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झामुमो और कांग्रेस के चार विधायकों ने मनरेगा की सोशल ऑडिट का विरोध

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झामुमो और कांग्रेस के चार विधायकों ने मनरेगा की सोशल ऑडिट का विरोध
झामुमो और कांग्रेस के चार विधायकों ने मनरेगा
  • झामुमो-कांग्रेस के चार विधायकों ने जिले केसीडी को लिखित पत्र दिया
  • आरोपों से झारखंड के रोल मॉडल बनने पर नया सवाल खड़ा हो गया

रांची, लातेहार, जमशेदपुर। झामुमो और कांग्रेस के चार विधायकों ने मनरेगा की सोशल ऑडिट का विरोध किया है। साथ ही व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए रोक लगाने के लिए .सीडी को पत्र भी लिखा है। ने कहा है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में सोशल ऑडिट का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था, जो संपूर्णिपूर्ण है। सवाल उठाने वालों में मनिका से कांग्रेस विधायक रामचंद्र सिंह, बहरागोड़ा से झामुमो विधायक समीर माेहंती, पोता से झामुमो विधायक संजीव सरदार और घाटशिला से झामुमो विधायक रामदास सोरेन शिमल हैं।

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चारांए ने ग्रामसभा से मनरेगा की सोशल ऑडिट व्यवस्था शुरू करने की मांग की है। अलग-अलग लिखित पत्र में आरोप लगाया गया है कि सोशल ऑडिट की टीम कमियां हटाकर मुखिया, मनरेगा कर्मियों और ठेकेदारों से दर्द वसूल रही है। यह सब झारखंड राज्य लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) में शामिल एक पार्टी विशेष के लोगों द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मनरेगा का सोशल ऑडिट पूरे देश में चल रहा है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सीएजी के मार्गदर्शन में सोशल ऑडिट की व्यवस्था है। झारखंड में चूंकि यूनिट नहीं है, इस कारण ग्रामीण विकास विभाग ने जेएसएलपीएस को सोशल ऑडिट की जिम्मेदारी दी है।

विस्तार में झारखंड को देशभर में दूसरा स्थान

विधायकों के सवाल उठाने के बाद झारखंड की सोशल ऑडिट टीम को विस्तार बरतने के मामले में मिले देशभर में दूसरे स्थान पर भी सवाल खड़ा हो गया है। ऑडिट टीम में पूरे राज्य में एक हजार लाएग काम कर रहे हैं। टीम ने ऑडिट के दौरान मनरेगा योजना में 36 करोड़ की राशि के गबन का मामला भी उजागर किया है। इनमें से 16 करोड़ रुपए की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा किया गया है।

बिहार, ओडिशा, यूपी में प्रशिक्षण दे रही टीम की टीम

झारखंड की सोशल ऑडिट प्रक्रिया को चरणबद्ध और प्रशिक्षण देने के लिए एक टीम उत्तराखंड, बिहार, ओड़िशा, उतरप्रदेश जैसे राज्यों का दौरा भी कर चुका है। जबकि कुछ राज्याें के लाेगाें ने यहां आकर आडिट की प्रक्रिया काे ठीक तरह से समझा है।

संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हाए रही साेशल ऑडिट

सोशल ऑडिट एक संवैधानिक प्रक्रिया है। प्रधान लेखाकार सह महानियंत्रक, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा साेशल ऑडिट के लिए ऑडिट स्टैंडर्स तैयार किए गए हैं। उसके आधार पर केवल ऑडिट किया जा रहा है। – गुरजीत सिंह, राज्य समन्वयक, साेशल ऑडिट यूनिट

सोशल ऑडिट में सोसाइटी की भूमिका नहीं होती है

जेएसएलपीएस की सोशल ऑडिट में कोई भूमिका नहीं है। राज्य में इसका सेल गठित हुआ है। ग्रामसभा ही कोर को सामने लाती है। विधायक क्या कहते हैं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। सचिन साहू, डीपीएम, जेएसएलपीएस, लातेहार।

सोलास ने सोशल ऑडिट किया

सोशल ऑडिट एनजीओ की बजाय ग्रामसभा से हो। इससे पहले ग्राम सभा में ही सोशल ऑडिट करती थी। मैंने इसी व्यवस्था की मांग की है। – संजीव सरदार, विधायक, पोटा

भाजपा की एजेंट के पास जेएसएलपीएस है

सोशल ऑडिट का मैं विरोधी नहीं, पर चाहता हूं कि जेएसएलपीएस के जरिए सोशल ऑडिट न हो। यह भाजपा की एजेंट है। – रामचंद्र सिंह, विधायक, मनिका

टीम में कम जानकारी वाले लोग हैं

ऑडिट टीम में कम जानकारी वाले लोग हैं। सरकार ने उन्हें जिम्मा दे दिया है। हमने दूसरी एजेंसी या फिर सरकार के स्तर से सोशल ऑडिट की मांग की- रामदास सोरेन, विधायक, घाटशिला

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