Home Uncategorized आदिवासी बेटी विनीता छह नक्सलियों से अकेले भिड़ी, नक्सल कमांडर को

आदिवासी बेटी विनीता छह नक्सलियों से अकेले भिड़ी, नक्सल कमांडर को

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पति और परिवार की जान को खतरा देखकर विनीता ने हिम्मत जुटाई और टांगी (हंसिया की तरह का हथियार) लेकर अकेले ही नक्सलियों भीड़ गई। नक्सली फायरिंग करते हुए दरवाजा तोड़कर घर में घुस आए थे। विनीता ने बहादुरी का परिचय देते हुए पहले टांगी से नक्सली कमांडर बसंत गोप को निशाना बनाया।

हाइलाइट्स

  • पीएलएफआई के करीब छह नक्सलियों ने विनीता के घर पर किया हमला
  • परिवार को खतरे में देख विनीता ने जुटाई हिम्मत, हाथों में उठाई टांगी
  • नक्सल कमांडर पर कर दी कई वार, घायल कमांडर को लेकर भागे नक्सली
  • रास्ते में नक्सल कमांडर की हुई मौत, नक्सल विनीता के ससुर की पहले कर चुके हैं हत्या
  • आदिवासी

गुमला
हमारे समाज में अक्सर कहा जाता है कि जब कोई औरत दुर्गा का रूप धारण कर लेती है तो वह बड़े से बड़े अत्याचारी का विनाश कर देती है। झारखंड के गुमला जिले में बुधवार को यह कथन जीवंत देखने को मिला। यहां गांव की बहादुर आदिवासी बेटी विनीता उरांव ने हिम्मत के साथ नक्सलियों का सामना किया और पूरे परिवार की रक्षा करने में सफल रही।

विनीता ने यूं किया नक्सलियों का सामना

गुमला पुलिस के मुताबिक बुधवार रात करीब आठ से नौ बजे के बीच उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के सब जोनल कमांडर बसंत गोप पांच-छह नक्सलियों के साथ विनीता के घर पर आ धमके। विनीता का घर गुमला सदर थाना से 10 किमी दूर वृंदा नायक टोली गांव में है। आरोप है कि नक्सली विनीता के पति की हत्या करने आए थे।

गुमला पुलिस

पति और परिवार की जान को खतरा देखकर विनीता ने हिम्मत जुटाई और टांगी (हंसिया की तरह का हथियार) लेकर अकेले ही नक्सलियों भीड़ गई। नक्सली फायरिंग करते हुए दरवाजा तोड़कर घर में घुस आए थे। विनीता ने बहादुरी का परिचय देते हुए पहले टांगी से नक्सली कमांडर बसंत गोप को निशाना बनाया। कमांडर को घायल देखकर बाकी के नक्सली घबरा गए। नक्सली अपने कमांडर को लेकर भागने लगे, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो

घर वालों ने एसपी को फोन का बताया पूरा घटनाक्रम

इस अफरातफरी के बीच परिवार के लोगों ने फोन कर एसपी एचपी जनार्दन को सूचना दी। तत्काल पुलिस पहुंची और पूरे गांव में कैंप में जुट गई। छापेमारी के दौरान बसंत गोप का शव जंगल से मिला है। शव लकड़ी में बंधा हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है कि घायल बसंत को उसके साथी लकड़ी में बांधकर कंधे में टांगकर भाग रहे थे, लेकिन जंगल में उसकी मौत हो गयी।

नक्सलियों के निशाने पर रहा है विनीता का परिवार

बताया जाता है कि बहादुर विनीता का परिवार पहले से ही नक्सलियों के निशाने पर रहा है। दो साल पहले नक्सलियों ने विनीता के ससुर शनिचरवा उरांव की पीएलएफआई के नक्सलियों ने लेवी के लिए हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से यह परिवार के रांची में रहकर मजदूरी करके पेट पालते हैं। कोरोना वायरस के चलते वे गांव लौटे तो नक्सली उनके घर पर आ धमके।

आदिवासी

पुलिस से विनीता ने बताया कि नक्सलियों के हमले के वक्त वह काफी डर गई थी, लेकिन परिवार पर आफत देखकर उसके अंदर हिम्मत आ गई और आत्मरक्षा में टांगी से ही आक्रमण कर दिया। लगातार टांगी के वार से नक्सली कमांडर घर के दरवाजे पर ही ढेर हो गया था। विनीता की बहादुरी से गांव के लोग खुश हैं। उनकी मांग है कि सरकार और प्रशासन विनीता को सम्मानि करे और पूरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

बता दें कि नक्सली कमांडर बसंत गोप दर्जनों आपराधिक कांड में शामिल था। बसंत गोप गुमला जिले में आतंक का पर्याय था इस के मारे जाने पर पुलिस ने राहत की सांस ली है।

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